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कोरोना वायरस से गर्भवती की सुरक्षा

कोरोना वायरस से ग्रस्त व्यक्ति जो खांसी करता है या नाक के द्वारा बूंदों को बाहर निकालता है, यदि उन बूंदों में अन्य व्यक्ति सांस लेते हैं तो वे भी कोरोना वायरस का शिकार हो सकते हैं । रोगी व्यक्ति की खांसी या साँस के साथ ये बूंदें चारों ओर की वस्तुओं और सतहों पर उतरती हैं । अन्य लोग इन वस्तुओं या सतहों को छूकर, फिर स्वयं की आंखों, नाक या मुंह को स्पर्श करके कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं ।

  • अलग रहना (isolation) – अत: स्वयं तथा शिशु की रक्षा हेतु गर्भवती माताओं के लिए अलग रहना (isolation) सर्वोपरि उपाय है । हाथों की सफाई, मास्क का उपयोग आदि अन्य सावधानियों के साथ-साथ अपनी रोग-प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाने में तत्पर रहें ।
  • गौ-चंदन धूपबत्ती – गौ-चंदन धूपबत्ती जलाकर नियमित प्राणायाम करें । धूपबत्ती पर घी डालें तो अच्छा । प्राणायाम करते समय तुलसी जी का पौधा पास में रखें तो और अच्छा है । हो सके तो घी का दिया जलाएं ।
  • सूर्यस्नान – ‘सूर्यस्नान’ अवश्य करें, अगर आपका श्वसन-तंत्र मजबूत होगा तो यह वायरस आप पर आक्रमण नहीं कर सकता ।
  • ओंकार कीर्तन – पूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी में ‘ओंकार कीर्तन’ घर में चालू रखें । स्वयं भी ओंकार का जप करें ।
  • रक्षाकवच – सुबह-शाम की संध्या में ओंकार का दीर्घ उच्चारण करते हुए अपने इर्द-गिर्द ‘सुरक्षा-कवच’ का निर्माण करें और गर्भ की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें ।

  • गोमूत्र या गोमूत्र अर्क – घर में गौमूत्र का छिड़काव करें व गौमूत्र से पोछा लगाएं । इस हेतु गोमूत्र अर्क अथवा गोमूत्र से निर्मित पवित्रता लानेवाले गौ शुद्धि सुगंध (फिनायल) का भी उपयोग कर सकते हैं ।

  • एक चम्मच गोमूत्र पानी में डालकर घर में पोंछा आदि किया जाए । फिनायल तो जीवाणुओं को मारता है, पवित्रता नहीं लाता परंतु गोमूत्र तो जीवाणुरहित करते हुए पवित्रता लाता है । (गोमूत्र अर्क अथवा गोमूत्र से निर्मित पवित्रता लानेवाले गौ शुद्धि सुगंध (फिनायल) का भी उपयोग कर सकते हैं ।)

  • गोबर के कंडे का प्रयोग – गाय के गोबर के कंडे का टुकड़ा जलाकर धुआँ करें । उस पर घी की बूँदें, चावल व जरा-सा कपूर का टुकड़ा डाल दें । आपके घर के दोषों को, कुप्रभाव को वह धूप ऐसा भगायेगा जैसे सूरज अँधियारे को भगाये । इससे 64,000 घन फीट क्षेत्र के वायरस के कीटाणु और हानिकारक बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं एवं आपके विचारों में जो हीनता-खिन्नता है वह हट जायेगी और  विचारों में प्रसन्नता व सात्विकता थोड़े ही दिनों में आ जायेगी ।

  • गूगल धूप – त्रिकाल संध्या में गोबर के कंडे जलाकर उसपर ‘गूगल धूप’ डालकर धूप करें । गूगल का धूप जहाँ होता है वहाँ से रोग के कीटाणु व परमाणु भाग जाते हैं ।

  • धूप करने हेतु कंडों पर कपूर, नीम, बेल, तुलसी जी के सूखे पत्ते या लकड़ी, सरसों, हींग, जौ, चावल व हल्दी भी डाल सकते हैं ।

  • नीम के पत्ते, फल, फूल, डाली, जड़ – इन पाँचों चीजों को देशी घी के साथ मिश्रित करके घर में धूप किया जाय तो रोगी को तत्काल आराम मिलता है, वातावरण में रोगप्रतिकारक शक्ति सर्जित हो जाती है ।

  • शंख – हानिकारक वायरस, कीटाणु संध्या के समय शंख बजाने से नष्ट होते हैं ।

  • आरती – कपूर और आरती का उपयोग करनेवालों के घरों में ऐसे कीटाणुओं का, हल्की आभा का प्रभाव नहीं टिक सकता है ।

  • स्वच्छता – हाथ-पैर साबुन से धोए बिना घर में प्रवेश न करें । घर में आने के बाद भी सर्वप्रथम स्नानघर में जाकर कपड़ों को पानी में भिगोकर फिर सिर से स्नान करने के बाद ही घर की अन्य वस्तुओं को स्पर्श करें ।

  • अत्यावश्यक काम के लिए घर से बाहर जाना पड़े तो नाक व मुँह को सूती वस्त्र से बाँध दें । कपूर व तुलसी के पत्तों की पोटली बनाकर उसे सतत् सूँघते रहें । हाथ का स्पर्श चेहरे पर न होने दें ।

  • पंचामृत - ‘पंचामृत’ का नियमित सेवन रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाएगा ।

                                 सावधानी जरुर रखें परन्तु भयभीत न हो ।

 

 

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