गर्भसंस्कार - सुसंस्कृत समाज की नींव

गर्भ संस्कार का मूल उद्देश्य है—माँ के विचार, भाव और वातावरण को शुद्ध, सात्त्विक एवं आनंदमय बनाना, ताकि गर्भस्थ शिशु पर श्रेष्ठ संस्कार पड़ें। शास्त्रों में माना गया है कि माँ का मन जैसा होता है, शिशु का मन वैसा ही आकार लेता है
ऐसे में भगवन्नाम लेकर हँसना गर्भ संस्कार की एक अत्यंत सरल, प्रभावशाली और सहज साधना है।

शारीरिक एवं मानसिक लाभ (माँ और शिशु दोनों के लिए)

  • हँसने से यकृत, पाचन तंत्र और फेफड़े सशक्त होते हैं।
  • तनाव, चिंता, भय और नकारात्मक भाव कम होते हैं—जो गर्भावस्था में अत्यंत आवश्यक है।
  • लाभप्रद हार्मोन्स (एंडॉर्फिन आदि) उत्पन्न होते हैं, जो माँ को प्रसन्न रखते हैं और गर्भस्थ शिशु को भी सुरक्षित व शांत ऊर्जा देते हैं।
  • हँसी से रक्त संचार सुधरता है, श्वसन क्षमता बढ़ती है और शरीर में विषैले तत्वों का शोधन होता है।
  • माँ की प्रसन्नता शिशु के स्नायु-तंत्र और मस्तिष्क के विकास में सहायक होती है।

आध्यात्मिक एवं संस्कारात्मक प्रभाव

भगवन्नाम के उच्चारण के साथ किया गया हास्य—

  • ईर्ष्या, क्रोध, द्वेष, भय जैसे दोषों को धीरे-धीरे नष्ट करता है।
  • गर्भस्थ शिशु में आनंद, निर्भयता, मधुरता और सकारात्मकता के बीज बोता है।
  • माँ-शिशु के बीच भावनात्मक एवं सूक्ष्म आध्यात्मिक संबंध को प्रगाढ़ करता है।
  • गर्भकाल को बोझ नहीं, बल्कि आनंदमय साधना काल बना देता है।

गर्भावस्था में देव मानव हास्य प्रयोग

गर्भवती माताएँ (और परिवार के सदस्य भी) प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल—

  1. शांत स्थान पर सीधे खड़े या बैठे हों
  2. दोनों हाथ ऊपर उठाएँ
  3. गहरी श्वास लेकर भगवन्नाम का स्मरण करते हुए खुलकर हँसें

जैसे—
हरि ॐ, हरि ॐॐ गुरुदेव…ॐ आत्मदेव…ॐ माधुर्यदाता….ॐ सुखस्वरूपा….ॐ चैतन्यरूपाहाऽऽ हाऽऽ हाऽऽ

यह हँसी कृत्रिम नहीं, बल्कि भाव से हो—मानो भीतर का आनंद बाहर छलक रहा हो।

सावधानी- गर्भवती बहनों के पेट पर जोर न पड़े, ऐसा ध्यान रखें ।

गर्भ संस्कार केवल श्लोक पढ़ना या संगीत सुनना ही नहीं है, बल्कि माँ का प्रसन्न रहना ही सर्वोत्तम संस्कार है। भगवन्नाम-सहित हास्य माँ को स्वस्थ, प्रसन्न और निर्भय बनाता है तथा गर्भस्थ शिशु को जीवनभर के लिए आनंद, स्वास्थ्य और सकारात्मक व्यक्तित्व का उपहार देता है। क्या आप प्रसन्न रहेंगे ? Comment box में लिखें ।

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गर्भस्थ शिशु को सुसंस्कारी बनाने तथा उसके उचित पालन-पोषण की जानकारी देने हेतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल द्वारा लोकहितार्थ दिव्य शिशु संस्कार अभियान प्रारंभ किया गया है ।