अन्नप्राशन संस्कार
16 संस्कारों में 7वाँ संस्कार आता है – अन्नप्राशन । शिशु को उसके जीवन में पहली बार सात्त्विक, पवित्र मधुरान्न का प्राशन कराना, खिलाना ‘अन्नप्राशन संस्कार’ कहलाता है ।
शुद्ध, सात्त्विक एवं पौष्टिक आहार से ही तन स्वस्थ रहता है और स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है । आहार शुद्ध होने पर ही अंतःकरण (मन, बुद्धि, चित्त व अहंकार) शुद्ध होता है एवं सात्त्विकता का पोषण होता है । इसलिए इस संस्कार का हमारे जीवन में विशेष महत्त्व है ।