गर्भसंस्कार - सुसंस्कृत समाज की नींव गर्भ संस्कार का मूल उद्देश्य है—माँ के विचार, भाव और वातावरण को शुद्ध, सात्त्विक
“माताएँ ! आप भगवान की भी माँ बन सकती हैं” पूज्य बापू जी का यह वचन  — “माताएँ ! आप
तेजस्वी संतानप्राप्ति हेतु व्रत युधिष्ठिर बोले: श्रीकृष्ण ! कृपा करके पौष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का माहात्म्य बतलाइये ।
Painkiller.......Safe or Not....!!! पेनकिलर वे दवाइयाँ होती हैं जिनसे पेन (दर्द) की खबर देनेवाले ज्ञानकोष मूर्च्छित हो जाते हैं और
कल्याणकारक सुवर्णप्राश        आचार्य चरक कहते हैं कि गर्भिणी के आहार का आयोजन तीन बातों को ध्यान में
माँ का अवचेतन मन कैसे करता है गर्भस्थ शिशु को प्रभावित गर्भावस्था केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं है; यह एक गहन
...क्या ये आवश्यक है ? संतान अपने माता-पिता के लिए मात्र खिलौना नहीं है बल्कि वह विश्व का भविष्य है।
माँ के दिए संस्कारों का प्रभाव सन् १८९३ में गोरखपुर (उ.प्र.) में भगवती बाबू एवं ज्ञान प्रभा देवी के घर
गर्भवती और प्रसूता माताओं के लिए फायदेमंद सिंघाड़ा पौष्टिक सिंघाड़ासिंघाड़े मधुर, शीतल, वीर्यवर्धक, पित्तशामक तथा रक्त विकार, जलन और सूजन
दिव्य संतान प्राप्ति योग का लाभ कैसे लें ? दिव्य संतान प्राप्ति योग - 15 नवम्बर 2025 से 16 जनवरी

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गर्भस्थ शिशु को सुसंस्कारी बनाने तथा उसके उचित पालन-पोषण की जानकारी देने हेतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल द्वारा लोकहितार्थ दिव्य शिशु संस्कार अभियान प्रारंभ किया गया है ।