नि:संतान को भी होगी संतान प्राप्ति... भीष्म पंचक व्रत इस वर्ष 1 नवम्बर से 5 नवम्बर तक भीष्मपंचक व्रत है
सुख-शांति, संतति व स्वास्थ्य प्रदायक गौ-सेवा व परिक्रमा (गोपाष्टमीः 30 अक्टूबर)देशी गाय की परिक्रमा, स्पर्श, पूजन आदि से शारीरिक, बौद्धिक,
यदि आप भी दूसरी गर्भधारणा के बारे में विचार कर रही हैं तो... एक संतान को जन्म देना हर माता-पिता
पर्वों का पुंजः दीपावली परम लाभ दिलानेवाले पंच पर्वों का पुंज : दीपावली(दीपावली पर्व : 18 अक्टूबर से 23 अक्टूबर)आर्थिक,
हे माँ ! तुम्हें प्रणाम... माँ की महिमा का वर्णन करते हुए ʹब्रह्मवैवर्त पुराणʹ में गणेश खंड के 40 वें
कार्तिक मास क्यों महत्वपूर्ण ? ‘स्कन्द पुराण’ में आया हैः न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगम्।। न वेदसदृशं शास्त्रं
गर्भवती और गर्भस्थ शिशु के लिए अमृतमय वरदान : शरद पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ कहते हैं
विजयादशमी - एक संकल्प दिवस नवरात्रि के नौ दिन साधना, उपासना और शक्ति के जागरण के दिन माने जाते हैं
वैवाहिक जीवन होगा सुखमय तो घर में आयेगी दिव्य संतान हिन्दू धर्म में जो सोलह संस्कार हैं, उनमें से तेरहवाँ
इसका नाम है आत्मसाक्षात्कार ! जिज्ञासु साधकों को अपने परम लक्ष्य ‘आत्मसाक्षात्कार’ सुस्पष्ट तात्पर्य-अर्थ जानने की बड़ी जिज्ञासा रहती है,

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गर्भस्थ शिशु को सुसंस्कारी बनाने तथा उसके उचित पालन-पोषण की जानकारी देने हेतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल द्वारा लोकहितार्थ दिव्य शिशु संस्कार अभियान प्रारंभ किया गया है ।