प्रेगनेंसी में अवश्य पढ़ें संस्कृत ... होंगे अद्भुत चमत्कार !!! देवभाषा संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है । संस्कृत व
अपने गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के मित्र बनें; शत्रु नहीं... बचपन से ही हमें भोजन-पानी की जैसी आदतें लग जाती
आँवला आँवले को धात्रीफल भी कहा जाता है । यह त्रिदोषशामक, विशेषकर पित्त व कफ शामक है । आँवला शुक्रवर्धक,
यदि आप भी रिफाइंड तेल का प्रयोग करते हैं तो... गर्भस्थ शिशु के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए
पितरों की प्रसन्नता से आती है दिव्य संतान दिव्य संतान की चाहना रखनेवालों को श्रद्धा और आदरसहित श्राद्ध करना ही
माँ की उत्तम शिक्षा का बालक पर पड़ा अद्भुत प्रभाव लाल बहादुर शास्त्री के पिता मर गये थे तब विधवा
षडरसयुक्त आहार का करें सेवन... हर किसी को कोई विशेष प्रकार का रस कम या अधिक प्रिय होता है ।
पुत्रदा एकादशी के व्रत से पुत्रप्राप्ति युधिष्ठिर बोले : श्रीकृष्ण ! कृपा करके पौष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का
पाचनतंत्र को दुरुस्त रखने के लिए अपनाएं ये पद्धति शास्त्र कहते हैं : आजकल सभी जगह शादी-पार्टियों में खड़े होकर
गर्भनाल काटने का सही समय ऋषि विज्ञान ऋषियों-महापुरुषों के वचनों पर अध्ययन एवं अन्वेषण कर विज्ञान बहुत ही अचरज व्यक्त

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गर्भस्थ शिशु को सुसंस्कारी बनाने तथा उसके उचित पालन-पोषण की जानकारी देने हेतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल द्वारा लोकहितार्थ दिव्य शिशु संस्कार अभियान प्रारंभ किया गया है ।